Thursday, December 10, 2020

गिनती छोडी

जबसे मैंने "गिनती" छोडी,
मैं खुश होती गई....
दिलके "घांव" गिनना छोडा तो,
वो जख्म भरते गए....
किसकी "बोली" गिनना छोड दिया, तो
मैं शांत शांत होती गई....
किसीको कितना दिया, नहीं गिना,
तो "अहंभाव" छूट गया ।
"हरिजप" गिनना छोड दिया,
तो भगवन् "बेहिसाब" देते गए... ।
✍️ सुजाता

No comments: