Monday, May 16, 2022

दर्द

ये दर्द भी कितना अजीब है,....
जितना पी लिया, ऊतनाही जी लिया.....
दर्द घटता गया,....ताकद बढती गई.....।
दर्द इतनासा,.... और मैं बढती गई.....।
जितना पार किया, मैं तैरती गई .....।
जैसे हीरा तरशा गया, सोना परखा गया.....
अब तो नशे सा चढ गया ये दर्द .....
जितना पी लिया,....ऊतनाही और जी लिया....।
-✍ सुजाता

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