🌹भगवान
काहे ढुंढे भगवान को पुजा में , मंदिर में ...
भगवान तो बसे , मूरख ,
तेरी आत्मा में, हर घर में !
काहे बिताए समय सारा
जप - जाप्य में , कर्म कांड में ....?
देदो वक़्त थोडासा
मात - पिता को, सखी - पुत्र को ।
जिनका कोई नहीं है जगमें
गर उनको अपनाओ तुम,
खुदही खुदा बन जाओगे,
उनकी तो नजरोंमें तुम ।
कहत सुजाता, सुनो भाई यारों,
जितना बाँटो स्नेह सभीं को,
दुगना मिलता है प्यारों .......!!
--सुजाता

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