Sunday, July 3, 2022

बारिश की बूंदें


🌧️⛈️🌨️
कितने बादल लाॅंघकर....
 कितने पर्वतों को पार करके 
कितनी दूर से आया हूं मैं 
बारिश की बूंदे बनकर.....।
मिलो तो मुझसे, छतरियाॅं हटाकर
भीगो तन मन से, .....
समां जाओ मुझमें.....
खुद से मिलोगे तुम, बारिश में भीग कर !
✍️ सुजाता 🌨️⛈️🌧️

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